Meri Awesome Chudai Valentine Day Par

Meri Awesome Chudai Valentine Day Par Hi guys mera naam tasha hai. Mei NRI hun. Mujhe sex stories padhna and sex krna bohot pasand hai. And ye story meri recent chudai(sex) Ki hai 14 feb ki. let me tell you about myself mei 5’3 height hoon 36d boobs,30 waist and 36 ass. I have a wheatish complexion. So let me start my story. Yeh baat iss 14 feb ki hai valentine day ki hai. mei waise toh single hun but I hook up very often. Uss din mei bohot horny feel kar rahi thi mei already 2 time dildo se cum kr chuki thi but pta nahi kyu meri chut shaant nahi ho rahi. Apna mind divert karne k liye meine mere friends k haath sham ko party ka plan kia.meine ek deep neck waali sequence dress pehni thi aur push up bra se mere boobs aur big aache lag rahe thy..Sab log kaafi drunk thy aur meine sabse kum pi thi. Hum sab log mere friend k farm house pe ruke (ritvik) ritvik aur mei kaafi purane friends hai. Usmei mujhe kaafi baar ask out kia hai but meine m...

ऑफिस की पंजाबन आंटी की छूत की प्यास

   
ऑफिस की पंजाबन आंटी की छूत की प्यास

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सैम है और मैं लखनऊ का रहने वाला हूं. मैं दिखने में शरीर से औसत ही हूं. मेरी हाइट भी पांच फीट आठ इंच है.
 मेरी उम्र 25 साल है 
आज जो मैं कहानी आपको बताने जा रहा हूं वो मेरे साथ वास्तव में ही घटित हुई थी. जहां पर मैं काम करता हूं वहां पर एक आंटी रिसेप्शनिस्ट के पद पर काम करती थी. वो पंजाबी आंटी देखने में एकदम मस्त थी. उसके बड़े बड़े छूत ड़ बाहर निकले हुए थे.

जब भी वो कुर्सी पर बैठती थी तो उसकी हांड उसकी कुर्सी पर बाहर निकली हुई अलग से ही दिखाई देती थी. जब वो चलती थी तो उसकी मोटी हांड ऐसे मटकती थी जैसे उसकी हांड को उसके बदन पर अलग से चिपका दिया गया हो.

आपस में रगड़ खाते हुए उसके हिलते हुए छूत देख कर मेरा हण्ड भी हिचकोले खाने लगता था. मैं ही नहीं बल्कि कोई भी उसकी हांड को देख कर उस पर फिदा हो सकता था. मैं अक्सर उस आंटी की हांड व छूत हुदाई के सपने देखा करता था. मगर मुझे कभी मौका नहीं मिल पाया था.

आंटी की दूध इतनी बड़ी और मस्त थीं कि उनको देख कर हण्ड से पानी निकलने लगता था. उसकी वक्षरेखा को कई बार मैंने रिसेप्शन की टेबल के ऊपर से झांक कर देखा था. जिस दिन उसके सफेद दूधों का हल्का सा भाग भी दिखाई दे जाता था उसी दिन मैं बाथरूम में जाकर मुठ मार लिया करता था.

बहुत बार मैंने उस फैक्स ी आंटी के नाम की मुठ मारते हुए अपना वीर्य निकाला था. शुरू में तो मैं भी उससे नॉर्मल ही बात किया करता था जैसे कि अक्सर सीनियर और स्टाफ के रिलेशन होते हैं. मगर गुजरते हुए वक्त के साथ धीरे धीरे मेरे मन में हवस जागने लगी थी और आंटी की छूत हुदाई के ख्याल मन में घर करने लगे थे.
अक्सर मैं आंटी से बातें करने के बहाने ढूंढा करता था. धीरे-धीरे आंटी के साथ मैंने दोस्ती करना शुरू किया. बातों ही बातों में उससे खुलने की कोशिश करने लगा. ऐसे ही करते करते मैंने आंटी का व्हाट्स एप नम्बर भी ले लिया था.

अब हम दोनों के बीच में व्हाट्स एप पर भी बातें होने लगी थीं. दो-तीन महीने के बाद आंटी से मेरी खुल कर बातें होने लगीं. हम दोनों अक्सर चैटिंग पर लगे रहते थे. शायद एक दूसरे के करीब भी आने लगे थे. जब भी आंटी के साथ चैट करता था तो मेरा हण्ड खड़ा हो जाता था.
आंटी के हस्बैंड एक बिजनेसमैन थे और ज्यादातर बाहर ही रहते थे. ये भी एक वजह थी कि हम दोनों में जल्दी ही नजदीकियां बढ़ने लगी थीं और हम दोनों करीब आ गये थे. कई बार तो आंटी के घर भी जाने लगा था मगर वहां पर जाकर पता चला कि उनकी ज्वाइंट फैमिली है इसलिए मैं रात को केवल मुठ मार कर सो जाता था.
आंटी के घर पर आंटी की छूत हुदाई का कोई जुगाड़ होता हुआ मुझे नहीं दिख रहा था. कुछ दिन ऐसे ही निकल गये.

एक दिन की बात है कि उस दिन रविवार का दिन था और मेरे ऑफिस की छुट्टी थी. मैं घर में चैन से सो रहा था कि अचानक ही सुबह के 9 बजे के करीब आंटी का फोन आ गया.
फोन उठा कर मैंने हैलो कहा तो आंटी बोली- अभी तक सो रहे हो क्या?
मैंने कहा- तो क्या इरादा है, आज भी काम करवाना चाहती हो आप?
आंटी बोली- तो मेरा काम नहीं करोगे?
आंटी डबल मीनिंग बातें कर रही थी. उसके मुंह से इस तरह की बातें सुनते ही मेरा हण्ड खड़ा हो गया.
आंटी से मैंने कहा- अरे कैसी बात कर रही हो, आपका काम नहीं करेंगे तो किसका काम करेंगे फिर?
वो बोली- तो फिर जल्दी से मेरे घर पर आ जाओ.
मैंने कहा- अभी?
वो बोली- काम अभी करवाना है तो अभी ही आना पड़ेगा न, या फिर अगले जन्म में आओगे?
मैंने कहा- अरे मैडम, आप कहो तो उड़ कर आ जाऊं?
आंटी बोली- नहीं, पैरों पर चल कर ही आ जाओ. तब तक मैं भी तैयार हो जाती हूं. अभी मैं बाथरूम में नहाने के लिए जा रही हूं.

आंटी जान बूझ कर मुझे फैक्स के लिए उकसाने वाली बातें कर रही थी. मगर उनको नहीं पता था कि मैं तो खुद ही उसकी छूत हुदाई के लिए मरा जा रहा हूं.
मैंने कहा- जब तक आप नहा कर बाहर निकलोगी, मैं आपके घर पर पहुंच चुका होऊंगा.
वो बोली- अगर इसी तरह बेड पर पड़े रहे तो शाम तक भी नहीं पहुंच पाओगे. अब जल्दी करो मुझे बहुत जरूरी काम है.
मैंने कहा- बस मैं अभी आया.
इतना कहने के बाद आंटी ने फोन रख दिया.
आधे घंटे के अंदर ही मैं तैयार होकर आंटी के घर पर पहुंच गया. मैंने आंटी के घर पर पहुंच कर दरवाजे की बेल बजाई और फिर कुछ ही सेकेंड के अंदर आंटी ने दरवाजा खोल दिया. आंटी गाऊन में थी और आंटी के बाल अभी भी गीले थे.

उसके मोटे चूचों की क्लीवेज देख कर मेरा मन मचल गया. मैं आंटी के दूधों की क्लीवेज को घूरने लगा और आंटी भी इस बात पर ध्यान दे रही थी कि मेरी नजर कहां पर है. आंटी मेरी नजर को भांप कर बोली कि देखते ही रहोगे या अंदर भी आओगे?

मैं अंदर चला गया. आंटी ने दरवाजा बंद कर लिया. घर में कोई दिखाई नहीं दे रहा था.
मैंने पूछा- घर के बाकी लोग कहां है?
वो बोली- तुम्हें घर के बाकी लोगों की क्या पड़ी है! अगर कहो तो पूरे मौहल्ले को बुला देती हूं. मेरे घर वाले तो बाहर गये हुए हैं.
आंटी की बात पर हंसते हुए मैंने कहा- देख लो मैडम, अगर मौहल्ला आ गया तो फिर आपके साथ कुछ भी हो सकता है.
वो बोली- क्या हो सकता है?
मैंने कहा- जब इतनी खूबसूरत महिला सामने खड़ी हो तो किसी की भी नियत बिगड़ जायेगी.

वो बोली- अच्छा, तो तुम्हारी नियत में भी खोट है क्या?
मैंने कहा- नहीं जी, हम तो आपके दोस्त हैं.
वो बोली- सिर्फ दोस्त ही हो!
मैंने कहा- तो, और क्या कहूं?
आंटी बोली- मैंने तो कुछ और ही सोचा था.
मैंने पूछा- क्या सोचा था?
वो बोली- रहने दो. तुम नहीं समझोगे.

मैं आंटी की प्यास को अच्छी तरह से समझ रहा था और आंटी की छूत हुदाई के बारे में सोच कर मेरा हण्ड भी पूरा का पूरा मेरी जीन्स में तन गया था. मगर मैं आंटी के मुंह से ही सब कुछ उगलवाना चाहता था.
कुछ देर तक ऐसे ही इधर उधर की बातें होती रहीं और फिर वो किचन में चाय बनाने के लिए चली गई.
किचन से चाय लेकर वो मटकती हुई मेरे पास आई और चाय का कप मेरी तरफ बढ़ा दिया.

मैंने पूछा- क्या काम है आपको. फोन पर किसी काम के बारे में बात कर रही थीं आप?
वो बोली- काम नहीं होता तो मिलने के लिए नहीं आते क्या?
मैंने कहा- नहीं, वो बात नहीं है. लेकिन मैंने सोचा कि आपको कुछ जरूरी काम होगा इसलिए मुझे इतनी इमरजेन्सी में बुलाया है.
वो बोली- मैं घर पर अकेली थी और बोर हो रही थी इसलिए तुमको फोन कर दिया. सारे घरवाले शाम तक वापस आयेंगे.

मैं आंटी की दूध को देख रहा था. यह जान कर कि आंटी घर पर अकेली है मेरा हण्ड तनतना उठा था. अब तो सारी लाइन क्लियर लग रही थी. मैं आंटी की दूध को अब जानबूझ कर घूरने लगा था.
वो बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- देखने की चीज को देखा ही जाता है.
वो बोली- देखने की चीज को हाथ में भी लिया जा सकता है.

इतना कहना था कि मैंने चाय के कप को अधूरा ही छोड़ कर आंटी को अपनी तरफ खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये.

आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी. बहुत दिनों से जिस मौके का इंतजार था वो आज मुझे मिला था. मैंने जोर से आंटी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. वो भी मेरा साथ बराबर देने लगी.

कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मेरे हाथ स्वत: ही आंटी के गोरे और मोटे दूधों पर चले गये. उसके दूध इतने बड़े थे कि ऐसा लग रहा था कि मेरे हाथों में दो बड़ी बड़ी बॉल्स आ गई हों.
मैंने आंटी के दूधों को दबाना शुरू कर दिया. साथ ही हम दोनों एक दूसरे के होंठों को भी लगातार चूसते जा रहे थे. मैंने आंटी के दूधों पर अपने हाथों की पकड़ को बढ़ा दिया. आंटी अब कसमसाने लगी थी.

उसके होंठों को छोड़ कर अब मैंने नीचे आना शुरू कर दिया. उसकी गर्दन को चूमा और फिर उसकी दूध की घाटियों में मुंह दे दिया. जीभ से उनको चाटने लगा. मेरी गर्म जीभ का स्पर्श जैसे ही आंटी दूध पर हुआ तो आंटी के मुंह से सिसकारी सी निकल पड़ी.

मैंने उसके गाउन को अब ऊपर उठाना शुरू कर दिया. उसकी मोटी मोटी जांघों को सहलाने लगा. अब मेरे सब्र का बांध टूटने लगा था और मैंने उसकी छूत को गाउन के अंदर से टटोलना शुरू कर दिया. उसने मेरे हाथ को हटा दिया मगर मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा दिया.

उसके गाउन को ऊपर करके आंटी की छूत तक के भाग को नंगा कर दिया. उसने नीचे से गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. जालीदार पैंटी में आंटी की फूली हुई छूत देख कर मैं उस पर टूट पड़ा. मैंने आंटी की छूत के इर्द-गिर्द पैंटी के किनारों पर उसको चूमना शुरू कर दिया.
वह मेरी इस हरकत से मचलने लगी. मैंने उसकी छूत पर मुंह रख दिया और छूत की खुशबू सूंघने लगा. 

आंटी अभी अभी नहा कर निकली थी और उसकी छूत से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी. पता नहीं उसने कौन सा परफ्यूम लगाया था जो मुझे उसकी छूत को खा जाने के लिए पागल करने लगा.
मैंने उसकी पैंटी को खींच दिया और उसकी बड़ी सी छूत को नंगी कर दिया. मैंने उसकी छूत पर होंठों को रख कर आंटी की छूत की चुसाई करना शुरू कर दिया. अब वो मेरे मुंह को अपनी गर्म छूत पर दबाने लगी.

उसके बाद मैंने आंटी की हांड पकड़ ली अपने दोनों हाथों से और आंटी की छूत में जीभ को डाल दिया और उसकी छूत को अपनी जीभ से चोदने लगा. वो सिसकारती हुई पागल सी हो उठी. वो जोर लगा कर मेरे होंठों को अपनी छूत पर दबाने और रगड़ने लगी.

आंटी की छूत में जीभ देकर मुझे भी गजब का नशा हो रहा था. आंटी की छूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. अब मैंने उसके गाउन को पूरी तरह से उसके बदन से अलग कर दिया और उसे पूरी की पूरी नंगी कर दिया.
अब आंटी मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी. आंटी की छूत से रिसता हुआ पानी अब चमकने लगा था. मैं भी अब खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा. शर्ट को उतार कर मैंने एक तरफ डाल दिया.

मेरी जीन्स में मेरा होड़ा फटने को हो रहा था. आंटी मेरे तने हुए होड़ऐ को देख कर कातिल मुस्कान दे रही थी. उसकी आंखों में हवस साफ साफ दिखाई दे रही थी. मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही था.
अपनी जीन्स को फटाक से उतार कर मैंने अन्डरवियर भी अलग कर दिया मेरा हण्ड देख कर आंटी के चेहरे पर चमक सी आ गई.
वो बोली- आह्ह … आज तो मजा आने वाला है.
आंटी की छूत को देख कर मैंने कहा- हां, मेरे होड़ऐ को भी बहुत मजा आने वाला है आज.
मैंने अंडरवियर उतारा ही था कि आंटी ने उठ कर मेरे हण्ड को अपने हाथ में ले लिया. आंटी के हाथ में हण्ड जाते ही मेरे अंदर एक मस्ती सी भर गई और जैसे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया.

आंटी ने अगले ही पल मेरे हण्ड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. आह्ह आंटी के गर्म मुंह में हण्ड गया तो मुझे ऐसा मजा आया कि मैं उसको शब्दों में नहीं बता सकता यहां.
वो तेजी के साथ मेरे हण्ड को चूस रही थी और मैं उसके गीले बालों में हाथ फिरा रहा था. करीब पांच मिनट तक उसने मेरे हण्ड को चूसा और जब थक गई तो हांफते हुए उसने मेरे हण्ड को बाहर निकाल दिया. मेरे हण्ड की नसें अब फटने को हो गई थीं और वो पूरा आंटी के मुंह से निकले थूक में नहा गया था.

अब मैंने आंटी के पैरों को फैला दिया और आंटी की गीली छूत पर अपने गीले हण्ड को रगड़ने लगा. ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर कई बार उसकी छूत पर अपने हण्ड को रगड़ा तो वो हुदाई के लिए तड़प उठी.
आंटी चिल्ला कर बोली- आह्ह, जान निकालोगे क्या, अब डालते क्यों नहीं इसको अंदर?
मैंने कहा- बिना कॉन्डम के ही डाल दूं?

वो बोली- जब तक तुम कॉन्डम लेकर आओगे तब तक मैं चुदास से तड़प तड़प कर मर जाऊंगी. अब देर मत करो प्लीज. जल्दी से अपने हण्ड को मेरी छूत में ठोक दो. बहुत दिनों से इसने ऐसा दमदार होड़ा नहीं लिया है.
मैंने आंटी की हालत देख कर उसकी छूत के मुंह पर अपने हण्ड के सुपारे को लगा दिया और एक झटका देते हुए आंटी की छूत में हण्ड को उतार दिया. आंटी के मुंह से दर्द भरी चीख निकल गई और मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया.
इतने में ही आंटी ने मेरी कमर को पकड़ लिया और अपनी तरफ दबा लिया ताकि मैं हण्ड को दोबारा से बाहर न निकाल पाऊं. कुछ देर तक वो मुझसे लिपटी रही और मैं उसके होंठों को चूसता रहा. उसकी छूत में हण्ड अंदर गया हुआ था और मुझे जन्नत का मजा मिल रहा था.

उसके बाद आंटी ने दो मिनट के पश्चात् अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि अब आंटी छूत की ठुकाई के लिए पूरी तरह से तैयार है. मैंने आंटी की छूत में हण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.
आंटी की हुदाई शुरू हो गई. अब उसके मुंह से कामुक आवाजें आने लगीं और पूरे कमरे में फक-फक की ध्वनि गूंजने लगी. हम दोनों इतने गर्म हो चुके थे कि एक दूसरे के बदन में घुसने को बेताब थे. मैंने जोर से आंटी की छूत को रौंदना शुरू कर दिया.

हण्ड के टोपे में उस समय एक जो सरसराहट हो रही थी उसका शब्दों में वर्णन करना बहुत मुश्किल है. आंटी की गर्म छूत की हुदाई करते हुए मुझे गजब का मजा आने लगा. उधर आंटी भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी छूत को चुदवा रही थी.
अगले पांच-सात मिनट तक उसकी छूत को अपने हण्ड से रगड़ने के बाद मैं आंटी की छूत में ही झड़ गया और आंटी के ऊपर ही गिर गया. वो मेरी कमर को सहलाने लगी और मेरे गालों पर किस करने लगी. मेरी धड़कनें बहुत तेजी के साथ चल रही थीं.

अभी तक मेरा हण्ड उसकी छूत में ही था. धीरे धीरे सिकुड़ कर अब हण्ड बाहर आने लगा और फिर एकदम से आंटी की छूत को छोड़ कर हण्ड बाहर निकल आया. मैंने अपने हाथ से आंटी की छूत को सहलाना शुरू किया और उसकी छूत से निकलते हुए वीर्य को महसूस भी किया.
हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ चिपके हुए पड़े रहे. मैं आंटी की छूत को अपने हाथ के द्वारा सहलाते हुए उसकी दूध को मुंह में लेकर पीता रहा और वो मेरे हण्ड को हाथ से सहलाती रही. उस दिन हुदाई का एक राउंड और हुआ. उसके बाद फिर शाम तक मैं आंटी के घर पर ही रहा.

उसके बाद मैं अपने घर वापस आ गया. इसके बाद कई बार मैंने आंटी की छूत बजाई और फिर अचानक से वो ऑफिस छोड़ कर पंजाब चली गई. अभी भी आंटी से मेरी बात होती रहती है. वो मुझे अभी भी याद करती है लेकिन हमें दोबारा मिलने का मौका नहीं मिला है.

जैसे ही आंटी के साथ फिर से मजे लेने का मौका मिलेगा मैं आप लोगों को जरूर बताऊंगा. आपको आंटी की छूत हुदाई की मेरी यह कहानी कैसी लगी इसके बारे में मुझे मेल करके बताना और कहानी पर कमेंट करके अपनी राय भी देना. मुझे आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा.
kunaalkunaal7@gmail.com



Comments