Meri Awesome Chudai Valentine Day Par

Meri Awesome Chudai Valentine Day Par Hi guys mera naam tasha hai. Mei NRI hun. Mujhe sex stories padhna and sex krna bohot pasand hai. And ye story meri recent chudai(sex) Ki hai 14 feb ki. let me tell you about myself mei 5’3 height hoon 36d boobs,30 waist and 36 ass. I have a wheatish complexion. So let me start my story. Yeh baat iss 14 feb ki hai valentine day ki hai. mei waise toh single hun but I hook up very often. Uss din mei bohot horny feel kar rahi thi mei already 2 time dildo se cum kr chuki thi but pta nahi kyu meri chut shaant nahi ho rahi. Apna mind divert karne k liye meine mere friends k haath sham ko party ka plan kia.meine ek deep neck waali sequence dress pehni thi aur push up bra se mere boobs aur big aache lag rahe thy..Sab log kaafi drunk thy aur meine sabse kum pi thi. Hum sab log mere friend k farm house pe ruke (ritvik) ritvik aur mei kaafi purane friends hai. Usmei mujhe kaafi baar ask out kia hai but meine m...

Holi Me Chachi Ke Petticoat Ke Andar Hath Dal Diya



Holi Me Chachi Ke Petticoat Ke Andar Hath Dal Diya
 




 दोस्तों यह बात इस बार होली की है, मेरा घर एक कॉलोनी में है और उस कॉलोनी में मेरे एक रिश्तेदार का घर भी है, वो लोग दो भाई है. दोस्तों वैसे तो वो लोग रिश्ते में मेरे चाचा लगते है, लेकिन उनकी बीवियों की और मेरी उम्र में ज्यादा फ़र्क नहीं है, में 27 साल का हूँ और मेरी बड़ी वाली चाची 35 साल की और छोटी वाली 33 साल की है, वो दिखने में थोड़ी सी मोटी लगती है, लेकिन मुझे तो वैसी ही औरते शुरू से बहुत पसंद है और हमेशा भरा हुआ बदन बहुत मस्त होता है, तभी तो दबाने में मज़ा आएगा. 




दोस्तों में उस दिन अपने दोस्तो के साथ सुबह से ही होली खेल रहा था और हमारी कॉलोनी में बहुत मस्ती हो रही थी और हमारी कॉलोनी में एक लड़की है, जिसके साथ में बहुत खुला हुआ हूँ और वो भी मेरे फ्रेंड ग्रुप में ही है और सभी को पता था कि हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब है, लेकिन हम लोगों के बीच में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वाला ऐसा कुछ भी नहीं था, बस हम लोग टाईम पास करते थे.


अब हम उसके साथ उस दिन सुबह से होली खेल रहे थे, उसकी बिल्डिंग की नीचे रंग खेलने के लिए उसकी बिल्डिंग वालों ने पूरा सेट अप तैयार किया हुआ था. गाड़ियाँ पार्किंग करने वाली जगह में सभी को होली खेलनी थी और उसके दूसरी तरफ अलग से नहाने के लिए टब रखा हुआ था.




हम लोग वहां पर बहुत देर तक खेले और वैसे उनकी बिल्डिंग के सारे लोग मुझे पहले से ही जानते थे, क्योंकि मेरा वहां पर बहुत बार आना जाना बना रहता था तो इसलिए वहां पर मुझे कोई भी रोक टोक नहीं थी. फिर वहीं पर सारे लोग जमा हो गये थे.


अब उसकी बिल्डिंग के सारे लोग एक तरफ मज़े कर रहे थे तो दूसरी तरफ संध्या को मेरे दोस्त और में एक दूसरे को बहुत परेशान कर रहे थे, कभी कभी उसको रंग लगाते समय उसके दूध छू जाते थे तो मेरे लिए अपने खड़े हण्ड का उभार छुपाना बहुत मुश्किल हो जाता था और फिर में जानबूझ कर उसको गर्दन या कमर पर रंग लगाने की कोशिश करता ताकि अगर वो मुझसे बचना चाहे तो मेरे हाथ उसके दूध से ना छू जाए, लेकिन वो भी बार बार खुद जानबूझ कर मुझे मौका दे रही थी, जिसकी वजह से मेरे लिए तो बहुत मौज हो गई थी.


तभी कुछ देर बाद बिल्डिंग के एक अंकल सभी के लिए कुछ मिठाई ले आए और वो अब सभी को मिठाई बांटने लगे, वो सब अलग अलग तरह की मिठाईयां थी. अब मैंने उनसे एक पेड़ा ले लिया और फिर अंकल को अपनी तरफ से धन्यवाद बोला.


अंकल भी अब डांस करते हुए आगे बड़ गए थे और में जब पीछे मुड़ा तो मैंने देखा कि संध्या भी वहीं पर खड़ी हुई थी और उसके हाथ में एक लड्डू था जो आधा खाया हुआ. तभी उसने मेरे मुहं में वो लड्डू ठूंस दिया और वो हंसकर मुझसे बोली कि हाँ खाओ खाओ और खाओ तुम्हें इसे खाने के बाद असली मज़ा आएगा.




फिर करीब दस मिनट के बाद मुझे अंदाजा हुआ कि उसकी बात का क्या मतलब था? क्योंकि मुझे अब हल्का हल्का सा नशा हो गया था, शायद उस लड्डू में भांग थी और वो भी अब नशे में पूरी तरह से झूम रही थी. जिसकी वजह से में और भी मौज में आ गया था, जिसकी वजह से में उससे और भी ज्यादा चिपककर डांस करने लगा और उस पर पानी डालने लगा.




तभी अचानक से वो मेरे पास आई और उसने मेरी टी-शर्ट के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया, उसके हाथ में बहुत सारा गुलाल था और हाथ को अंदर डालने के बाद वो मुझसे बोलने लगी कि ऐसे रंग लगाने में कुछ ज्यादा मज़ा आता है और रंग पूरा अंदर तक जाता है. दोस्तों में तभी उसकी बातें और मुस्कुराने का मतलब तुरंत समझ गया था कि यह मुझसे चाहती है कि में इसके दूध को भी रंग से लाल कर दूँ.


में उसका इशारा समझकर मन ही मन बहुत खुश था और भांग के नशे में होने की वजह से मुझे किसी बात का कोई डर भी नहीं था और में बिल्कुल निडर हो चुका था. अब मैंने झटके से उसका एक हाथ पकड़ा और अपने दूसरे हाथ में गुलाल ले लिया और फिर मैंने इधर उधर देखकर जल्दी से उसके टॉप में अपना हाथ अंदर डाल दिया.


मेरे ऐसा करते ही उसके तो एकदम होश ही उड़ गये और अब में सीधा उसके निप्पल तक पहुंच गया और ज़ोर से उसके एक दूध को दबाने लगा था. मेरे निप्पल को निचोड़ने की वजह से वो एकदम छटपटा गई, लेकिन उसकी आँख में भी सेक्स का नशा साफ झलक रहा था.


फिर कुछ देर बाद मैंने स्पीड से अपना हाथ बाहर भी निकाल लिया और मैंने उससे पूछा कि क्यों संध्या रंग लगाने में ऐसे ही मज़ा आता है ना? तो वो मुझे एक शरारती स्माईल देकर वहां से भाग गई और अब वो अपनी बिल्डिंग के लोगों के साथ डांस करने लगी और अब में भी बड़ा गरम हो चुका था, क्योंकि उस दिन मैंने पहली बार किसी के दूध को दबाए थे और वो भी ऐसे खुले में मेरे मन में एक अजीब तरह की संतुष्टि थी और उस दिन में मन ही मन बहुत खुश था.


हम लोगों ने वहां पर कुछ देर डांस किया और तब तक दिन के 12 बज चुके थे तो सभी लोग एक एक करके थक हारकर नहाने चले गये, में भी अपने घर पर चला आया. मम्मी ने मेरा ऐसा हाल देखा तो उन्होंने मुझे सीधा नहाने जाने का इशारा किया और में टावल लेकर सीधा बाथरूम में नहाने चला गया. 


और में बाथरूम के दरवाजे पर ही पहुंचा ही था कि मेरी मम्मी ने मुझे आवाज़ लगाई और फिर कहा कि शायद गरिमा और सविता चाची हम सभी से होली मिलने आएँगे, तुम जल्दी से तैयार होकर बाहर आ जाना और उसके बाद हम सभी लोग मंदिर भी जाएँगे.


फिर मैंने मन ही मन सोचा कि यार अब तो होली खत्म हो गई है और यह लोग अब रंग लगाने आ रहे है और फिर में नहाने चला गया. दोस्तों कुछ देर पहले संध्या के साथ हुई उस घटना की वजह से मेरा हण्ड पहले से ही बहुत जोश में था और में अंदर घुसते ही उस हसीन लम्हें को याद करने लगा.


और जैसे में उसके मुलायम, गोल गोल दूध मेरे गुलाल से भरे हाथ में थे, में उनको कैसे दबा रहा था और कभी कभी में मन में सोचने भी लगता था कि जब वो ऐसे नंगी होकर नहाएगी तो उसके दूध पर मेरे हाथों के निशान होंगे और में तो उस समय यह सभी बातें सोचकर मुठ मार रहा था और में उन सपनों में खोया हुआ था और पूरी तरह से डूब चुका था.


करीब पांच मिनट के बाद अचानक से दरवाजे पर ज़ोर से किसी के मारने की आवाज़ आई, जिसको सुनकर में डर गया और बाहर से मेरी सविता चाची की आवाज़ आ रही थी, क्या हुआ रोहन अंदर क्या साफ करने चला गया, अभी होली खत्म नहीं हुई है, जल्दी से दरवाजा खोलो नहीं तो हम दरवाजा तोड़ देंगे.


दोस्तों वैसे में आप सभी को बता दूँ कि में अपनी गरिमा चाची और सविता चाची से थोड़ा सा खुला हुआ हूँ और वैसे हमारी उम्र में ज्यादा अंतर नहीं होने की वजह से हम लोग कभी कभी बहुत खुलकर बातें कर लिया करते थे और व्हाट्सअप पर भी हम बहुत सारी बातें खुलकर किया करते थे. अब मैंने अंदर से ही बोला कि चाची में अब नहा लिया हूँ.


आप दोबारा से मुझे गंदा मत कर देना, नहीं तो मुझे एक बार फिर से इतनी मेहनत करके सारा रंग उतारना पड़ेगा. फिर चाची का बाहर से जवाब आया कि ठीक है हमारे पास थोड़ा सा ही कलर है, तू इस बात की बिल्कुल भी चिंता मत कर, लेकिन तू क्या सोचता है कि तू हमसे बच जाएगा ऐसा कभी नहीं होगा. फिर कुछ देर बाद मैंने सोचा कि में अब दरवाजा खोल देता हूँ नहीं तो यह हल्ला मचा देंगे.


मैंने जल्दी से अपने खड़े हण्ड को बिना मुठ मारे शांत किया और टावल लपेटकर बाथरूम का दरवाजा खोला और जैसे ही मैंने कुण्डी को हटाया तो चाची ने मुझे ज़ोर से धक्का मार दिया, जिसकी वजह से में अंदर हो गया और अब में उनसे बचने की कोशिश कर रहा था और चाची मेरे साथ ज़बरदस्ती कर रही थी और इतने में गरिमा चाची भी आ गई और उन्होंने मेरे ऊपर पीछे से एक बाल्टी भरकर पानी डाल दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा टावल भीग गया था.


दोस्तों मेरे हण्ड अब भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ था और पानी की वजह से हण्ड का सारा आकार अब साफ हो गया था और मुझ पर पानी डालकर वो बाथरूम से बाहर भाग गई और जाते जाते उन्होंने बाथरूम की कुण्डी बाहर से मार दी. फिर मैंने बहुत बार दरवाज़ा पीटा.


लेकिन वो तो अपना काम खत्म करके दूसरे रूम में चली गई और मम्मी के पास जा चुकी थी और उधर मेरे पीछे सविता आंटी भी भीग गई थी, हम दोनों अब अंदर ही थे. दोस्तों उस समय सविता आंटी साड़ी पहने हुई थी और पानी की वजह से उनका ब्लाउज उनके दूध से पूरा चिपक गया था और में उनकी निप्पल को बाहर से देख रहा था, उनके दोनों निप्पल बड़े आकार के उभरे हुए थे.


दोस्तों उस घटना से पहले तक कभी भी मेरे मन में उनके लिए कोई भी गंदा ख्याल नहीं आया था, लेकिन उस समय 
मेरे हण्ड पर खून भी सवार था और सर में भांग का नशा भी था और अब बस मेरा मन डोलने ही वाला था. तभी सविता चाची रंग का एक और पैकेट अपने एक हाथ में लेकर मेरी तरफ बढ़ने लगी और में उनसे बोला कि चाची प्लीज मुझे अब आप रंग मत लगाओ, में भी अभी अभी नहाया हूँ.  


  लेकिन वो मुझसे बोली कि कोई बात नहीं बस एक ही तो पैकेट है और फिर हंसते हुए उन्होंने अपने ब्लाउज में से रंग का एक और पैकेट बाहर निकाल लिया, जिसकी वजह से मुझे उनके दूध के दर्शन हुए, लेकिन यह भी दिख गया था कि उनके ब्लाउज के अंदर और भी पैकेट्स रखे हुए है. फिर में समझ गया था कि आज यह नहीं मानेंगे और मुझे दोबारा नहाना ही पड़ेगा, इसलिए मैंने अपना चेहरा मेरे दोनों हाथों से ढक लिया, उन्होंने मुझे चेहरे पर रंग लगाने की बहुत कोशिश की, लेकिन लगा नहीं सकी, वो लगातार कोशिश करती रही और में उनसे बचता रहा.


फिर आखरी में चाची ने मुझसे बोला कि रोहन अब तू चुपचाप मान जा नहीं तो मेरे पास इसके अलावा और भी तरीके है और में उनकी बात को सुनकर हंसने लगा. तब भी मैंने अपने चेहरे को अपने हाथ से छुपा रखा था तो इसलिए मुझे ज्यादा साफ साफ दिखाई नहीं दे रहा था.


दोस्तों तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि मेरे दोनों हाथ तुरंत अपने आप चहरे से हट गए, क्योंकि मेरी सविता चाची ने अपना हाथ मेरे टावल में डाल दिया और 
अब मेरे टाईट तनकर खड़े भीगे हुए हण्ड पर उनका गरम कोमल हाथ रगड़ खा रहा था और वो मेरे हण्ड को रंग लगाने के लिए मसल रही थी. फिर कुछ देर बाद मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपने हण्ड को पूरा खड़ा होने दिया और वो भी इस बात को समझ गई, लेकिन हम दोनों ने अनदेखा किया और कुछ सेकेंड्स मसलने के बाद चाची ने हाथ को बाहर निकाल लिया.


अब तक मेरा हण्ड टावल में एकदम टेंट बन चुका था. तभी मैंने चाची से बोला कि आप रुकिये में अभी आपको बताता हूँ. फिर जैसे में उनकी तरफ बढ़ा वो भागने की कोशिश करने लगी, लेकिन जमीन के गीला होने की वजह से वो फिसलकर गिर गई. अब मैंने उन पर थोड़ा सा भी रहम नहीं दिखाया और में तुरंत उनके ऊपर जाकर बैठ गया, उनका पल्लू हटाया और उनके दोनों हाथों को अपने घुटनों के नीचे दबा लिया.


   मैंने उनके ब्लाउज में अपना एक हाथ डाल दिया और रंग के उस पैकेट्स को बाहर निकाल लिया और में जोश मस्ती में बिल्कुल ही भूल गया था कि वो मेरी क्या लगती है? और में ऐसे उन पर हाथ मार रहा था जैसे रोज रात को में उसके साथ ही बिताता हूँ. मैंने रंग का पैकेट फाड़ दिया और एक पैकेट को उनके चेहरे पर छिड़क दिया, जिसकी वजह से उनकी आखें एकदम बंद हो चुकी थी.
उनका पूरा चेहरा उसमें रंग चुका था और एक पैकेट को मैंने उनकी छाती पर डाल दिया था और फिर में अपने हाथ से उनके चेहरे पर रंग लगाने लगा था और फिर मैंने उनकी छाती पर अपने हाथ से बहुत हल्के हल्के से मालिश की और वो बस सिर्फ़ अपना मुहं इधर उधर कर रही थी और पैर पटक रही थी और लगातार ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी.


फिर कुछ देर बाद सविता चाची ने फिर से पता नहीं कैसे अपना हाथ मुझसे छुड़वा लिया और उन्होंने मेरे पैरों के नीचे से टावल के अंदर अपना एक हाथ डालकर उन्होंने झट से मेरा हण्ड पकड़ लिया. मेरा हण्ड एकदम लोहे सा मोटा हो गया था और में भी थोड़ा सा उठा और अपने हाथ से मैंने उनकी साड़ी को ऊपर किया, जिसकी वजह से मुझे उनकी हैंटी नजर आने लगी थी और अब मैंने हैंटी के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और हुत को छूकर मेरे मन के विचार बिल्कुल बदल गए.


दोस्तों में आप सभी को क्या बताऊँ , एक जवान हुत और एक माँ बनी हुए हुत में बहुत अंतर होता है और मुझे हुत को छुते ही महसूस हो गया कि उनकी हुत के अंदर कितनी गर्मी जोश छुपी हुई है? शादीशुदा औरतों की हुत हमेशा आग की तरह धधकती रहती है और मुझे छूकर ऐसा लगा जैसे अंदर कोई भट्टी जल रही हो.  
 मैंने गरिमा चाची की हुत की गरमी को भी छूकर महसूस किया है, अभी कुछ महीने से उनका भी वही हाल था जो वो उस समय मेरा था और संध्या की हुत टाईट और बहुत मज़ा देने वाली थी, 
लेकिन वो ऐसी गरम नहीं थी. दोस्तों में यह दोनों अनुभव आप सभी को अपनी अगली कहानी में पूरे विस्तार से बाद में जरुर बताऊंगा.

अब में सविता आंटी की हुत को अपनी मुट्ठी में लेकर मसल, सहला रहा था और वो मेरे हण्ड को ज़ोर से जकड़े हुए थी. फिर वो मेरा हण्ड को पास लेकर अपनी नाभि पर सटाने लगी थी और में उनकी उस हरकत से तुरंत समझ गया कि आज तो मेरी किस्मत में मेरे लिए हूदाई का वो सुख लिखा हुआ है. 

अब मैंने ज्यादा समय खराब नहीं किया और दो तीन बार उनकी नाभि पर अपना हण्ड सटाया और झट से सही मौका देखकर उनकी पेंटी के एक साईड से मैंने अपने हण्ड को उनकी हुत में डाल दिया.
मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि उनकी हर रोज रात को हूदाई होती रहती है और संध्या तो मेरे हण्ड डालते ही एकदम से उछल गई थी.

 फिर जब मैंने पहली बार अपना हण्ड उसकी हुत में उतारा था, लेकिन सविता आंटी ने तो बहुत आराम से मेरा हण्ड अपनी हुत में लेकर एक हल्की सी सिसकी जरुर अपने मुहं से बाहर निकाली, लेकिन उसकी आवाज बहुत धीमी थी.

अब मैंने जल्दी ही अपने धक्को की स्पीड को बढ़ा दिया था. सविता चाची ने अपनी दोनों आखें बंद कर रखी थी और वो अपने ब्लाउज के ऊपर से दूध को भी सहला रही थी, वो उस समय पूरे जोश में थी और शायद पूरी तरह से गरम हो चुकी थी.


 फिर दो तीन मिनट के बाद उन्होंने अपने दूध को बिल्कुल आज़ाद कर दिया. में क्या बताऊँ दोस्तों वाह क्या मस्त आकार के एकदम गोल गोल गोरे दूध थे उनके, साला मेरा तो उनको देखकर दिमाग़ ही खराब हो गया और अब मेरे धक्को की स्पीड अपने आप ही दुगनी हो गई. मैंने तुरंत ही अपने रंग लगे दोनों हाथों से उनके दोनों आकर्षक दूध को पकड़ लिया, जिसकी वजह से उनके दूध पर मेरी उँगलियों के निशान छप गये थे. अब मैंने उनके ऊपर दूध पर और नीचे हुत पर पूरा ज़ोर लगाया था.


मेरा हण्ड लगातार हुत के अंदर बाहर होता रहा और वैसे यह काम कुछ देर तक लगातार चलता रहा. तभी कुछ देर में मेरा निकल गया और मैंने जल्दी से हण्ड को हुत से खींचकर बाहर निकाल लिया और सारा माल उसकी नाभि पर गिरा दिया.


 चाची अब एकदम से ढीली पड़ गई थी और मेरा भी हण्ड अब शांत हो गया था, जिसकी वजह से मेरी चाची के शरीर पर से पड़क कमजोर होने लगी थी और फिर मुझे हल्का सा थप्पड़ मारा और उठ गई.
में भी खड़ा हो गया और चाची ने सबसे पहले तो अपनी साड़ी को ठीक किया और उसके बाद वो अपने ब्लाउज को ठीक करने लगी. फिर मैंने उनसे बोला कि चाची आप क्या अपने दूध पर लगा सबूत नहीं मिटाओगी? चाचा को पता चल गया कि उनकी शेरनी का आज किसी ने शिकार किया है तो वो बुरा मान जाएँगे.
फिर चाची ने शरारती हंसी हंसते हुए बोला कि बेटा आज शेरनी ने ही आज भी अपना शिकार किया है और जहाँ तक रही सबूत मिटाने की बात तो तेरे चाचा अब देर रात तक ही आएँगे, तू शाम को आ जाना सारे सबूत मिटाने. अब मेरे मुहं से स्माईल निकल गई और चाची हंसती हुई जाकर दरवाजे पर खड़ी हो गई और दरवाजा पीटने लगी. गरिमा चाची ने दरवाजा खोला और हम दोनों को हंसते हुए देखा और पूछने लगी कि क्या हुआ है तुम लोगों को? ज्यादा मस्ती हो गई क्या? तो सविता चाची ने जवाब दिया कि हाँ और आपको रोहन को रंग नहीं लगाना क्या? आप भी जाओ ना अंदर और इतना कहकर सविता चाची ने गरिमा चाची को भी अंदर धक्का दे दिया और वो मेरी छाती पर आकर पड़ी, वो अब मेरी बाहों में थी. मैंने उनको कसकर पकड़ लिया और उन्होंने मुझसे अपने आपको छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रही.

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