Meri Awesome Chudai Valentine Day Par

Meri Awesome Chudai Valentine Day Par Hi guys mera naam tasha hai. Mei NRI hun. Mujhe sex stories padhna and sex krna bohot pasand hai. And ye story meri recent chudai(sex) Ki hai 14 feb ki. let me tell you about myself mei 5’3 height hoon 36d boobs,30 waist and 36 ass. I have a wheatish complexion. So let me start my story. Yeh baat iss 14 feb ki hai valentine day ki hai. mei waise toh single hun but I hook up very often. Uss din mei bohot horny feel kar rahi thi mei already 2 time dildo se cum kr chuki thi but pta nahi kyu meri chut shaant nahi ho rahi. Apna mind divert karne k liye meine mere friends k haath sham ko party ka plan kia.meine ek deep neck waali sequence dress pehni thi aur push up bra se mere boobs aur big aache lag rahe thy..Sab log kaafi drunk thy aur meine sabse kum pi thi. Hum sab log mere friend k farm house pe ruke (ritvik) ritvik aur mei kaafi purane friends hai. Usmei mujhe kaafi baar ask out kia hai but meine m...

ट्रैन लेट है कहकर 12 घंटे गेस्ट हाउस में भैया ने होदा


ट्रैन लेट है कहकर 12 घंटे गेस्ट हाउस में भैया ने होदा



मैं जब दिल्ली से घर जा रही थी अपने भइया के साथ तो भैया मुझे तुरंत घर नहीं लेते वह 12 घंटे तक मेरी हुदाई किया पटना के गेस्ट हाउस में यानी एक होटल में। जब घर वाले का फोन आता था कि कहां तक पहुंचा तो वह कह देता था कि ट्रेन लेट है किसलिए 12 घंटे बाद पहुंचेंगे। यही बहाना बनाया था उसने और फिर मुझे पटना स्टेशन पर उतारकर बाय गेस्ट हाउस में लेकर आ रात भर मुझे होदा और फिर सुबह लोकल पकड़ के अपना घर पहुंच पाए।


दोस्तों यह मेरी सच्ची कहानी है , मेरा नाम दिव्या है मेरे भाई का नाम अनिल है मेरा भाई मेरे से 2 साल बड़ा है। वह मुझे दिल्ली से लेकर आया था ठोके मुझे परीक्षा देना था मेरा सेंटर पड़ा था एसएससी का। वापसी में ही ऐसा हो गया था कांड कि मुझे वह पटना में उतार लिया .

हुआ  यू कि एक दिन दिल्ली में रहकर हमने पेपर दिया और दूसरे दिन फिर वहां से ट्रेन थी। एक ही टिकट कंफर्म था और एक वेटिंग लिस्ट में हो गया था। तो हम दोनों एक ही बेड पर यानी कि एक ही बर्थ पर बैठकर और लेट कर आए थे। दिल्ली से जब गाड़ी खुली गाजियाबाद के पार पहुंची। तब तक कुछ भी नहीं हुआ था हम दोनों आराम से बैठे हुए थे साइड का बर्थ था। आपको भी पता है एक बर्थ पर बैठना भी मुश्किल हो जाता है जब आप पैर फैलाएंगे तो सामने वाले को टक्कर लगेगा। और जब एक कोई लड़की और लड़का बैठा हो तो टक्कर बदल जाती है।

एक दो बार उसने सॉरी बोला पर फिर उसके टांग मेरे जांग के पास आकर टच करने लगा। और एक बार जैसे मेरा गलती से उसके तरफ पैर चला गया और मेरी टांग मेरा पैर उसके हंड  में जाकर सटा। मैं हैरान रह गयी उसका हंड  बहुत टाइट था।

 दोस्तों उसका मन तो पहले से खराब था उसकी नियत अच्छी नहीं थी पर जैसे ही मैंने उसके हंड  को टच किया मेरे नियत भी खराब होने लगी। अब मैं भी अपने पैर को उसके हंड  से सटा देती थी। अब वह अपना पैर मेरे दोनों जांघों के बीच में ले आता था और हौले हौले से टच करता था यानी आप समझ गए  वह मेरी छूत के पास अपने हंड  को सटा रहा था बार-बार।


मेरे सीट पर जो पर्दा लगा हुआ था भाई ने उसको अच्छे से बंद कर दिया था कि बाहर के लोग जो आता जाता है देख ना पाए।

 क्योंकि वातानुकूलित से हम लोग जा रहे थे। धीरे धीरे बात आगे बढ़ी और वह अपना सिर मेरे गोद में रखकर लेट गया। धीरे-धीरे वह मेरी दूध  को टच करने लगा। धीरे धीरे मैं भी उस को सहलाने लगी। फिर हम दोनों कुछ आगे बढ़ गए। उसने अपना हाथ मेरी टॉप और ब्रा के अंदर डाल दिया। और मेरी दूध  को मसलते हुए मेरे निप्पल को रगड़ने लगा। मेरे बदन में तो आग लग रही थी दोस्तों। मेरी छूत गीली हो रही थी। सिसकारियां लेने लगी।

उसके बाद मैं उसके गोद में लेट गई कंबल ऊपर रख ली। अब मेरा भाई मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और बुरा क्यों को नीचे से खोल दिया और मेरी दूध  को दोनों हाथों से दबाने लगा मसलने लगा। मैं सिसकारियां लेने लगी अंगड़ाइयां लेने लगी। ट्रेन सर पर भागी जा रही थी। तो मुंह से ऐसी कोई आवाज निकल जाए इसका भी डर नहीं था। होले होले आआ आआआ ओह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह की आवाज तो कर रही थी पर यह आवाज सिर्फ मेरे भाई कोई सुनाई दे रहा था बाहर वाले को सुनाई नहीं दे रहा था।

मेरा भाई मेरे होंठ को छूकर बोला कि तेरे होंठ कितने गुलाबी है। इतने दिनों तक तो मैं तुम्हें अपनी बहन के नाते देख रहा था। पर आज मेरा देखने का नजरिया कुछ और हो गया है इसलिए तुम बिल्कुल सेक्सी और हॉट लग रही हो। 

यह बात तो सच है दोस्तों के जवाब किसी रिश्ते में होते हैं तो उस रिश्ते की मर्यादा को ध्यान में रखकर ही कोई बात बोलते हैं और देखते हैं। और जब यह मर्यादा टूट जाती है तो देखने का नजरिया बदल जाता है आप उसको अलग निगाह से देखते हैं यह आपको भी पता होगा।

धीरे-धीरे वह मेरे बदन को सहलाने लगा मेरे बाल खोल दे मेरे बाल को उलझा कर सुलझाने लगा। उसके होंठ मेरे होंठ पर जैसे आए दोस्तों हम दोनों ही एक दूसरे को होठ को चूसने लगे चूमने लगे किस करने लगे। वह अपना जीभ निकाला मैं उसके जीभ को चूसने लगी।

 जब मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली वह मेरे जीभ को चूसने लगा। प्यार और वास दोनों परवान चढ़ने लगा। 2:30 से 3 घंटे तक हम लोग यही करते रहे। पर सामने वाला अंकल शायद भनक लग गई। कि हम दोनों कुछ कर रहे हैं क्योंकि वह बार-बार झांकने की कोशिश करते थे पर बाहर से तो कुछ दिखाई नहीं देता था हम दोनों उन अंकल को देख रहे थे।


वह बार बार टॉयलेट जाने लगे और जब वह वापस आते थे तो झांक कर देखने लगे। मैं समझ गई कि उनको शायद हम दोनों की करतूत के बारे में पता चल गया। फिर हम दोनों शांत हो गए रात ज्यादा हो गया था। अब हम दोनों की वासना तो भड़क चुकी थी। पर करते क्या जालिम जमाना दुश्मन जो बाहर बैठा था वह बार-बार समझने की कोशिश करने लगा कर हम दोनों क्या कर रहे हैं तो ऐसे में कुछ भी करना रिस्क भरा हो सकता था। इसलिए हम दोनों आराम से बैठ गए।

भाई को एक उपाय सूझा उसने बोला यह काम करते हैं रात भर हम दोनों पटना में रुक जाते हैं और घर में बोल देते हैं कि ट्रेन लेट चल रही है। यही हुआ दोस्तों घर से फोन आया उसने कह दिया कि ट्रेन लेट है 12:00 से 15 घंटे लेट हो जाएगा। मेरे मम्मी पापा बहुत सीधे साधे हैं उनको ज्यादा कुछ नहीं पता देश दुनिया से वह टीवी तक नहीं देखते हैं। ज्यादा देर वह खेतों में बिताते हैं तो उनको ज्यादा पता भी नहीं चलता कि देश दुनिया में क्या हो रहा है। उन्होंने बोला कोई बात नहीं है। तुम लोग रात को नहीं होगा तो पटना स्टेशन पर उतर जाना और वहीं रुक जाना स्टेशन पर और सुबह आना आराम से रात में मत आना फिर।

मेरे भैया मुझे होटल में ले गया एक गेस्ट हाउस में। फिर दोस्तों होटल का दरवाजा बंद करते ही उस कमरे का जो हम दोनों एक दूसरे पर टूट पड़े आप को शब्दों में बयां नहीं कर सकते। 2 मिनट में मेरे सारे कपड़े उतार दिए मैंने भी उसके कपड़े तुरंत उतार दिए। वह मेरे बड़ी-बड़ी दूध  को हाथ में लेकर खेलने लगा मेरे निप्पल को चूसने लगा दबाने लगा दो उंगलियों से रगड़ने लगा। मैं बेड पर लेट गई मुंह पर चढ़ गया पर मेरे दोनों टांगों के बीच में बैठकर मेरे छूत को चाटने लगा दोस्तों मेरे छूत  को चाटने लगा। मैं सिसकारियां लेने लगी अंगड़ाइयां देने लगी मेरे अंदर की ज्वाला भड़क गई थी दोस्तों। छूत पानी पानी हो गया था।

वह तुरंत ही अपना जीभ लगा दिया अपना उंगली मेरी छूत में डालने लगा बाहर निकालने लगा मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। वह मेरी छूत में एक उंगली डाला अंदर-बाहर करने लगा दो उंगली डालो फिर अंदर बाहर करने लगा। मैं तुरंत ही उसका हंड  पकड़ कर चूसने दे मुझे। उसका  मोटा और लंबा था मैंने अपने मुंह में ले ली। और उसके हंड  को चूसने लगी। पर वह मुझे जल्दी से जल्दी होदना चाहता था। वह तुरंत मेरे दोनों पैरों को अलग-अलग कर छूत  के बीच में रखकर जोर से धक्का देकर पूरा हंड  मेरी छूत  में घुसा दिया।

हम दोनों हिचकोले लेने लगे हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे चूमने लगे सहलाने लगे। मेरा भाई मुझे बोलता था तुम मुझे पति बोल, मैं भी उसको समय पति बोलती थी मेरे पतिदेव खूब होदो तुम बड़े अच्छे पति हो तो मेरा कितना ख्याल रखते हो। वह भी कहता था कि तू मेरी पत्नी है तू कितनी खूबसूरत है तेरे नैन नक्श कि तेरी दूध  कितनी बड़ी-बड़ी और टाइट है कितनी सेक्सी हो तुम मेरी जान मेरी बीवी हो तुम मेरी पत्नी हो तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो तुमतने सुंदर हैं तेरी छूत कितने टाइट है। मैं भी उसको कहते थे कि इस बार मैं तेरे लिए तीज का व्रत रखूंगी करवा चौथ का व्रत रखूंगी तू मेरा पति है तू मेरा कितना ख्याल रखता है।

यह सब बोलने के बाद और भी ज्यादा जोश चढ़ता था और हम दोनों एक दूसरे को जम के ऊपर से वह नीचे से मैं गांड को गोल गोल घुमा कर उसके हंड  को अपनी छूत  में दे रही थी। 


दोस्तों गजब मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं एक दूसरे की वास को शांत करने के लिए ही बने हैं। हम दोनों ने एक दूसरे को खुश किया किसी बात के लिए रोका नहीं मेरे भाई को जो जो मन कर रहा था वह करने दे रही थी मैं उसको रोक नहीं रही थी। हम दोनों ने पूरी रात हुदाई की। सुबह जल्दी उठकर फिर से एक बार नहा धोकर हम दोनों खड़े खड़े ही सेक्स किए।

फिर पटना जंक्शन से एक लोकल ट्रेन लेकर हम दोनों अपने गांव के लिए निकल पड़े। ट्रेन लेट है का बहाना बनाकर होटल में जम के मस्तियां की यह यादगार लम्हा शायद कभी ना भूल पाऊंगी मैं। यह मेरी जिंदगी का खास दिन था। आज हम दोनों के रिश्ते अलग ही हो गए हैं दोस्तों। 



Comments